सोमवार, 21 अप्रैल 2008

होना.. ना होना

होना...
एक सीमा रेखा है..
असीमित के खुले विस्तार में
दुख की नदी के
दोनों पाटों पर भव्य प्रासाद
ना होने को..
संकुचित कर देते हैं....
उपस्थित की भीतियों से
शनै शनै टकराती हैं..
संभाव्य की लहरें...
सीमा रेखा होकर भी
अर्थहीन है
ना होना एक अर्थ है
शब्द, समर, शेष से परे,......

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